कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की कोशिश हो तो डरें नहीं ऐसे करें सामना | Firstpost

Op-Eds by Nyaaya · January 26, 2019
Author(s): Malavika Rajkumar

#MeToo (‘मी टू’) आंदोलन के महत्व को कम आंका नहीं जा सकता और कार्यस्थल पर समानता केवल तब ही प्राप्त की जा सकती है जब प्रक्रियात्मक और संस्थागत बाधाएं, शिकायत दर्ज करने के सिस्टम को अवरुद्ध न करें. उत्पीड़न के बंधनों को तोड़ने के लिए कानून के प्रति एक प्रगतिशील दृष्टिकोण की आवश्यकता है, और महिलाओं एवं पुरुषों दोनों को अपने करियर के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए समान अवसर मिलने चाहिए.

कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की घटनाओं से यौन उत्पीड़न के पीड़ितों की प्रगति बाधित हो जाती है. इसका सीधा परिणाम यह है कि ये उनके काम करने और रहने की परिस्थितियों पर प्रभाव डालती हैं. साथ ही पीड़िता के लिए अपमान और डर का वातावरण बना रहता है. आमतौर पर, कार्यस्थलों में, यौन उत्पीड़न के सामान्य उदाहरण ये हो सकते हैं, जैसे छेड़खानी करना, रात के भोजन या ड्रिंक के लिए बार-बार सामाजिक निमंत्रण देना, जहां सेकसुअल फेवर पूर्वानुमानित है या अपेक्षित है. यौन उत्पीड़न महिलाओं को आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से प्रभावित करता है.

यौन व्यवहार और अवांछित व्यवहार दोनों ही यौन उत्पीड़न हैं. यौन उत्पीड़न का व्यवहार, अप्रत्यक्ष हो सकता है या एकदम स्पष्ट हो सकता है. स्पष्ट व्यवहार ज्यादातर आम है क्योंकि उत्पीड़न करने वाला व्यक्ति अधिकार के पद पर होता है. यौन उत्पीड़न, नौकरी की धमकी के तहत किए गए यौन के तकाजे या एहसान तक ही सीमित नहीं है. कार्यस्थल पर, व्यवहारों के अनेक प्रकार यौन उत्पीड़न के दायरे में आते हैं. उत्पीड़न का सबसे आम व्यवहार जो ‘यौन’ प्रकृति के हैं, वे हैं:

-शारीरिक उत्पीड़न: शरीर छूने की विभिन्न गतिविधियां जो अवांछित हैं, जैसे किस, चुटकी काटना, वासना की दृष्टि से देखना, इत्यादि.

-मौखिक उत्पीड़न: डबल मीनिंग चुटकुले सुनाना, किसी व्यक्ति के शरीर के बारे में यौन संबंधित टिप्पणियां करना, आदि.

-सांकेतिक उत्पीड़न: शारीरिक हावभाव सेक्सुअल इशारे देना.

-लिखित या फोटो उत्पीड़न: यौन गतिविधि से संबंधित चित्र दिखाना, ईमेल के माध्यम से उत्पीड़न, अश्लील सामग्री (पोर्नोग्राफी) आदि

इस कानून के तहत किसे पीड़ित कहा जाएगा?

यौन उत्पीड़न कानून के अनुसार, पीड़िता सिर्फ महिला ही हो सकती है. कानून के तहत एक पीड़िता किसी भी तरह की कामकाजी महिला हो सकती है, जैसे पूर्णकालिक कर्मचारी, अंशकालिक कर्मचारी, कार्यस्थल के आगंतुक, घरेलू सहायिका इत्यादि.

यौन उत्पीड़न के बारे में शिकायत कैसे करें?

आपको संस्था की ‘आंतरिक शिकायत समिति (इन्टरनल कमप्लेन कमिटी-ICC)’ में अपनी शिकायत दर्ज करनी होगी, जो कि आपके संगठन के भीतर ही गठित एक समिति है. हर एम्पलॉयर को इस समिति को कानूनन स्थापित करना होता है.

किसी भी कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के बारे में शिकायत दर्ज करने के लिए आप इस समिति से संपर्क कर सकते हैं. आप इन तरीकों से शिकायत दर्ज कर सकते हैं:

-शिकायत का प्रारूप तैयार करें, शिकायत की छह प्रतियां बनाएं, शिकायत के साथ-साथ उन दस्तावेजों को जो आपके शिकायत में सहायक हो जरूर जमा करें.

-सुनिश्चित करें कि आप उन गवाहों के नाम और पते जमा करें जो आपकी शिकायत का समर्थन कर रहे हैं.

-यौन उत्पीड़न के तीन महीने के अन्दर ही आप अपनी शिकायत, आंतरिक शिकायत समिति को दें.

आंतरिक शिकायत समिति क्या है?

10 से अधिक कर्मचारियों वाले कार्यस्थलों को अपनी आंतरिक शिकायत समिति गठित करनी होती है जो विशेष रूप से यौन उत्पीड़न के मामलों की ही सुनवाई करती है. आंतरिक शिकायत समिति को शिकायत लेने और उससे संबंधित पूछताछ को एक उचित समय के अंदर कर लेने का अधिनियम है. कंपनी या संस्था को, अपने आंतरिक शिकायत समिति को वे सभी चीजें देनी होगी जो उन्हें पूछताछ करने के लिए आवश्यक हैं.

आंतरिक शिकायत समिति को शिकायत दर्ज करने की समय सीमा क्या है?

यौन उत्पीड़न के तीन महीने के अंदर ही आपको अपनी शिकायत आंतरिक शिकायत समिति को दर्ज करनी होगी.

क्या शिकायत दर्ज करने के बाद कानून आपकी रक्षा करता है?

नीचे दिए गए तरीकों से कानून आपकी रक्षा करता है, और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने पर आपको बर्खास्त या काम में दरकिनार किये जाने से बचाता है.

वातावरण को सुरक्षित बनाना: यदि आप यौन उत्पीड़न के शिकार हैं, तो आप आंतरिक शिकायत समिति को लिखकर उन्हें आपके अपने कार्यस्थल को सुरक्षित बनाने के लिए कह सकते हैं.

छुट्टी प्रदान करना: यदि आपको कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न किया गया है और आपने शिकायत दर्ज की है, तो आमतौर पर आंतरिक शिकायत समिति आपके मामले को देखेगी. जब वे ऐसा कर रही हैं, तो आपका एम्प्लॉयर आपको काम करते रहने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है या आपका बकाया किसी भी छुट्टी को काट नहीं सकता है. आप अपनी छुट्टी का उपयोग कर सकते हैं और यहां तक कि समिति से कुछ और छुट्टियों की मांग भी कर सकते हैं.

महिला की गोपनीयता: एक पीड़िता के रूप में, आपको अपनी शिकायत और उसके बाद होने वाली चीजों को गोपनीय रखने का अधिकार है. जानकारियां, जैसे नाम, पता इत्यादि किसी भी तरह से जनता, प्रेस, या मीडिया को प्रकाशित, संचारित, या सार्वजनिक नहीं की जा सकती है.

कानून के तहत संगठन की भूमिका क्या है?

प्रत्येक संगठन या कार्यस्थल को एक आंतरिक शिकायत समिति का गठन करना अनिवार्य है, जिसमें ऐसे अपराध की पीड़िता सीधे शिकायत कर सकती है. कानून के तहत, एक नियोक्ता को महिलाओं के लिए एक सुरक्षित कार्य वातावरण बनाने के लिए कुछ कदम उठाने होते हैं.

अगर एम्प्लॉयर अपने संगठन में एक आंतरिक शिकायत समिति को गठित नहीं किया है या इस कानून के किसी प्रावधान का पालन नहीं किया है, तो इस स्थिति में एम्प्लॉयर को, कानून के तहत अधिकतम पचास हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया जा सकता है. संगठनों में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को रोकने की जिम्मेदारी एम्प्लॉयर की होती है और उसकी ओर से हुई कोई चूक, कानून के तहत, उसे दंड का भागी बनाती है.

यदि कोई पीड़िता आंतरिक शिकायत समिति से असंतुष्ट है, तो क्या वह न्यायालय जा सकती है?

हां, कोई पीड़िता किसी कंपनी/एम्प्लॉयर के खिलाफ न्यायालय में शिकायत दर्ज कर सकती है अगर उसे लगता है कि उसकी शिकायत आंतरिक शिकायत समिति द्वारा संतोषजनक ढंग से नहीं सुनी गई है, और तब वह इस कानून के तहत उनके निर्णय के खिलाफ अपील भी कर सकती है.

विकल्प 1: लेबर कोर्ट

उन सभी मामलों में जहां सेवा नियम लागू नहीं होते हैं, इस तरह की अपील को श्रम न्यायालय, या इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल, या राज्य सरकार के तहत नामित किसी भी व्यक्ति को जो औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम के अंतर्गत अपीलीय प्राधिकारी हो, प्रस्तुत किया जा सकता है.

विकल्प 2: हाई कोर्ट / सुप्रीम कोर्ट

हालांकि यदि कोई अनियमितता या दोष इतना स्पष्ट है कि वह रिकॉर्ड से ही दिखता है, जैसे कि आंतरिक शिकायत समिति का गठन ही न करना, तो ऐसे निर्णय के खिलाफ एक याचिका, भारत के संविधान अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय) या अनुच्छेद 32 (सर्वोच्च न्यायालय) के तहत, दायर की जा सकती है. यदि कोई महिला औद्योगिक विवाद को उठाने में किसी वित्तीय बाधा का सामना करती है, तो यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम (लीगल सर्विसेज ऑथोरिटीज ऐक्ट), सभी महिलाओं और औद्योगिक कामगारों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करता है. इसके अलावा, कोई न्यायपालिका जो मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट से नीचे स्तर की न हो, इस अधिनियम के तहत किसी भी दंडनीय अपराध की सुनवाई कर सकती है.

आवश्यकता पड़ने पर एक महिला अपनी शिकायत के लिए, जिसकी सुनवाई उसकी आंतरिक शिकायत समिति ने नहीं की है, न्यायालय से संपर्क करने के अलावा, अपने जिले की स्थानीय शिकायत समिति (लोकल कमप्लेन कमेटी) से संपर्क कर सकती है, या अपील दायर कर सकती है.

क्या आंतरिक शिकायत समिति के अलावा कोई और वैकल्पिक उपाय है?

यदि आपका कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न किया जा रहा है, तो आपके पास इसके विरुद्ध आपराधिक शिकायत दर्ज करने का भी विकल्प है. एक आपराधिक शिकायत, अगर साबित हो जाती है, तो आपके उत्पीड़न करने वाले को जेल की सजा होगी. भारत का आपराधिक कानून यौन उत्पीड़न के कृत्यों को अवैध मानता है, इस प्रकार, आप एफआईआर दर्ज करके या पुलिस से संपर्क कर सकती हैं, या मजिस्ट्रेट को एक निजी शिकायत कर सकती हैं.

अगर कर्मचारियों को आंतरिक शिकायत समिति में चुने गए लोगों के बारे में कोई समस्या है तो क्या कानून में इसका कोई विकल्प है?

एक कर्मचारी एम्प्लॉयर से शिकायत कर सकता है कि आंतरिक शिकायत समिति के चयन में कुछ मानदंड पूरे नहीं किए गए हैं और तब एम्प्लॉयर, उस व्यक्ति को आंतरिक शिकायत समिति से हटाने का अधिकार रखता है. किसी सदस्य को समिति से हटाने के बाद, एम्प्लॉयर को उसकी जगह एक नया सदस्य मनोनित करना होगा.

(लेखिका ‘न्याया’ के साथ जुड़ी हैं, एक संगठन जो सरल भाषा में भारत के कानूनों की व्याख्या करता है. ‘न्याया’ 26 जनवरी, 2019 को अपनी हिंदी वेबसाइट लॉन्च करने जा रहा है)

Originally Published – https://hindi.firstpost.com/india/how-to-deal-with-sexual-harassment-on-work-place-186141.html


About Malavika Rajkumar:

Malavika is a Research Fellow (Content Lead) at Nyaaya at Vidhi. She is a graduate of Symbiosis International University and holds a B.B.A.LLB degree. Her main areas of research include womens's rights, child rights, social welfare legislations, gender based violence and information design. She also writes regularly on publications such as Live Law and Firstpost. Before joining Vidhi she completed a summer course on International Relations from Kings College London in 2017. She has worked on the Legal Development Project funded by WHO on ‘Road Safety and Design’ and in the National Policy and Research Team by IDIA (Increasing Diversity by Increasing Access). Link to full bio